अनंतिम

सत्यव्रत की हिंदी/हिंदुस्तानी रचनाएँ

Posts Tagged ‘रंग

रंग

with 2 comments

[अक्टूबर 2010]

लोग काले और सफ़ेद में सोचते हैं,
पर सब नहीं- कुछेक और रंगों में भी सोच लेते हैं,
लाल, हरे, नीले… मोम के कलर बॉक्स के बारह रंगों में,
सभी इतने में नहीं मानते-
वो पानी वाले चौबीस रंगों का डिब्बा रखते हैं,
उनमें से कुछ कलाकार जोड़-घटा और मिला-जुला कर और भी रंग बना लेते हैं,
और,
कुछ नए शोहदे अलां और फलां क्रोमेटिक रंगों से सैकड़ों-हज़ारों रंग तैयार करते हैं.

हाँ, शायद इतने ही रंगों में रंगी है ये दुनिया,
या के बाकी जो कुछ बचे भी हैं वो सब गैरज़रूरी हैं!

Written by SatyaVrat

मई 19, 2011 at 11:48 अपराह्न