अनंतिम

सत्यव्रत की हिंदी/हिंदुस्तानी रचनाएँ

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Goonj: एक जुगलबंदी

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[नवम्बर 2012]

पिछले नवम्बर में मैंने और एक मित्र राम्या ने जागा, बैंगलोर में एक काव्यात्मक जुगलबंदी की. राम्या अंग्रेज़ी में कप्लेट पढ़तीं, और मैं उसका जवाब हिंदी में देता. पेश है वो मज़ेदार जुगलबंदी:

 

Why do I need just one home
Why cant I just freely roam?

चिड़ियों को नहीं देखा तुमने?
वो भी तो उड़ती हैं, और घोसला भी बनाती हैं!

I see the birds, I see their flight
But my own confines become my plight

ये जो ख़्वाब हैं- यही तुम्हारे पंख हैं!
..इन्हें ज़रा सा फड़फड़ाओ तो!

They are dangerous, these dreams you know
They might take my heart in tow

बहने वाला पानी देखो सूखता नहीं,
चलने वाली हवाएं कभी सीलती नहीं,
और कुछ खोजता हुआ राही कहीं खोता नहीं!

It is true that I will be much happier when I flow
But there is so much baggage I have to first let go

सीने में दबी उलझनें पतंग की डोर हैं-
ढील देना.. पर डोर न छोड़ देना

Will this string be my grounding, my connection to a base
So I don’t lose myself in a never ending chase?

हाँ, ये डोर फिर बहाना है बस
इस मुहँ बाए आकाश को कहीं से तो नापना शुरू करने की कोशिश

Yes we need a locus, a point of reference
Originating from where, the rest can make sense

नापना- जोखना ही हार है, जीत है, ख़ुशी है, ग़म भी है,
और हाँ अभी तो तुम भी हो.. हाँ अभी तो हम भी हैं!

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Written by SatyaVrat

जून 6, 2013 at 2:24 पूर्वाह्न

प्रारम्भिक में प्रकाशित किया गया

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