अनंतिम

सत्यव्रत की हिंदी/हिंदुस्तानी रचनाएँ

रात अभी बाक़ी है

with 10 comments

आँखें न बंद करो, के रात अभी बाक़ी है,
मुद्दत से कह रहा जिसे वो बात अभी बाक़ी है.

लहू हमारा भी कभी आँख से टपकता था,
चेहरे की शिकन पर निशानात अभी बाक़ी है.

ये दिल का फितूर है, या ख़लल है दिमाग़ का,
जिस्म तो फ़ना हुआ, जज़्बात अभी बाक़ी है.

सुबह बदरंग थी, दोपहर खाली थी,
शाम भी मायूस गयी, रात अभी बाक़ी है!

Written by SatyaVrat

सितम्बर 13, 2011 at 9:56 पूर्वाह्न

10 Responses

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  1. रात अभी बाकी है,सुंदर भाव…

    induravisinghj

    सितम्बर 13, 2011 at 4:09 अपराह्न

  2. रात अभी बाकि है …बहुत बड़ी बात कह दी आपने इन चंद शब्दों में ……बधाई आपको इस सुन्दर रचना को हम तक पहुंचाने के लिए …

    upendradubey

    सितम्बर 13, 2011 at 11:19 अपराह्न

  3. मियाँ मुक़र्रर !!!

    Nanga Fakir

    सितम्बर 15, 2011 at 1:53 पूर्वाह्न

  4. bahut sunder

    saurabh

    अक्टूबर 12, 2011 at 3:06 अपराह्न

  5. good one

    saurabh

    अक्टूबर 12, 2011 at 3:07 अपराह्न

  6. ati uttam rachana

    saurabh

    नवम्बर 22, 2011 at 11:57 पूर्वाह्न

  7. सत्यव्रत जी आपकी इस कविता में एक जिज्ञासा सी प्रतीत होती है की किस प्रकार से एक नयी सुबह का इंतज़ार है जो की हमारी मेहनत को एक नया रंग दे सके,यह बहुत ही सुन्दर रचना है आप अपनी एसी ही रचनाओं को अब शब्द्नगरी पर भी प्रकाशित कर सकती हैं, वहां पर भी
    !!जैसे कोई साथी मेरा जनम-जनम का, अब भी रहता जैसे हर पल साथ वो मेरे!!
    जैसे कई प्रकार के लेख उपलब्ध हैं ……..


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