अनंतिम

सत्यव्रत की हिंदी/हिंदुस्तानी रचनाएँ

पानी-पानी

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[ग्रीष्म 2009]

हम लोग तो पानी को
ऊपर से पीते हैं
नीचे से बहाते हैं
और कुछ हमारे आका हैं
जो इसमें चीनी घोल के
लाखों कमाते हैं
वो मुआ कौन है-
जो पानी पीके
फ़ौरन
नीचे से नहीं बहाता है
और वहाँ साइड में जाके
अपना मगज खपाता है
चीनी भी नहीं घोलता
लाखों भी नहीं कमाता है
ये हमारी और आकाओं की
अमानत में ख़यानत है
पानी और चीनी की-
लानत मलानत है
हमें बस पानी को
पानी-पानी कर डालना है
या तो चीनी घोलना
या नीचे से निकालना है.

Written by SatyaVrat

सितम्बर 3, 2010 at 12:15 पूर्वाह्न

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